जय श्री कृष्णा !
यह ब्लॉग आप सभी को भारत की बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने के लिए बनाया गया हे क्यों की आप सभी को जानकारी मिल सके , इस ब्लॉग पर आप सभी तरह की भजन, कवी सम्मलेन, जैसे कि विनोद अग्रवाल जी, पंकज झालोत जी, लता मंगेशकर जी, शैलेश लोढ़ा आदि की फोटो और चलचित्र मिल सके और रोजना की उपयोग कि सरे लिंक एक ही जगह आप तक पहुँचाया जाय ,
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अगर हर एक भारतीय ऐसा करे तो भारत बदल जायेगा
प्रश्न १) अगर हर एक भारतीय कागज रहित काम करे तो क्या होगा ?
उत्तर :- प्रौद्योगिकी का विकास होगा ,
पेड़ नहीं काटेंगे तो सही समय से बरसात होगी , फसल बढ़ेगी , किसानों का फायदा होगा .
वातावरण सही रहेगा ,
आम नागरिक स्वस्थ रहेगा ,
देश का पैसा देश में रहेगा क्योंकि लोग स्वस्थ रहेंगे तो विदेशी दवा कोई नहीं खायेगा ,
भारत का पैसा भारत में ही रहेगा , विदेशी पैसे की जरूरत नहीं होगी ,
लगभग २ -३ लाख करोड़ रुपये का हर साल भारत देश बचत करेगा.
जिससे रोजगार पैदा होगा , लोग चिंता मुक्त होंगे , खुश रहेंगे .
प्रश्न २) अगर भारत का हर ब्यक्ति स्वच्छ भारत का सपना देखे तो क्या होगा?
उत्तर :- भारत दुनिया का सबसे स्वच्छ देश बन जायेगा . बीमारी देश को छोड़ देगी ,
कोई बीमार नहीं होगा . लोग स्वस्थ और खुश रहेंगे .
लेकिन स्वच्छता भारत जैसे देश में ये सरकार का काम है, अगर ये काम जनता का होजाए
तो भारत जल्दी स्वस्थ हो जायेगा , अगर अब भी जनता स्वच्छता के लिए सरकार को कोसती
है तो जल्दी ही चीन जैसी हालात हो जायेंगे , ऑक्सीजन भी पैसे से खरीदनी पड़ेगी.
प्रश्न ३) अगर भारत का हर परिवार दहेज़ को प्रतिबंदित करदे तो क्या होगा ?
उत्तर:- बैसे तो सरकार की तरफ से तो दहेज़ लेना देना भारत में बंद है, लेकिन अकल के अंधे और पैसे के
घमंडी लोग अब भी दहेज़ लेते देते है , अगर ये पूरी तरह बंद हो जाये तो भारत का करोड़ो रूपया
ख़राब होने से बच जायेगा वो इसलिए कि जिनके पास पैसा होता है वो लोग ही बेईमानी ज्यादा
करते है, और शादियों में फालतू के आडम्बर भी वो लोग ही समाज में पैदा करते है जिससे माध्यम
बर्गीय परिवार और गरीब परिबार में भी यही बीमारी पनपती है , देश में सिर्फ २-३ प्रतिशत लोग ही
आमिर है , बाकि गरीब लोग उनकी नक़ल करने के चक्कर में बर्बाद होते है , अगर ये बीमारी खत्म
हो जाये तो तलाक के मुकदमे भी नहीं होंगे और न्ययाय पालिका भी बदनाम होने से बचेगी और
अगर दहेज़ कोई लेता है तो कोई देता भी है ऐसे मुकदमे में दोनों पक्ष को दोषी होना चाहिए
में अक्सर उन दिनों के बारे में सोचता हु , जब जंगलों को छोड़ घर मे भी गोरैया की चहचहाट सुनाई देती थी , लेकिन आज जंगलो में भी ये सब सुनाई नहीं देता , इंसान कितना निर्दयी हो गया और होता जा रहा हे , हम अक्सर भागती दौड़ती जिंदगी के पीछे इतने भाग रहे हे जिसका कोई अंत नहीं , और उसको छोड़ते जा रहे हे जो हमारा भविस्य नहीं ,
सुबह सुबह बिना किसी अलार्म के या घंटी केगोरैया की चहचहाट के साथ उठजाना, कितना अच्छा दिन होता था , लगता हे उन दिनों में बापस लोट जाऊँ , पर हकीकत तो ये हे की सब कुछ पा भी लिया जाये तो भी वो सब नहीं मिल सकता ,
गोरैया के साथ साथ जाने कितने पशु -पक्छी गायब हो गए लेकिन सभी को अपने आगे आने की ही पड़ी , पैसे के लिए इंसान इतना अँधा हो गया हे की अपने आस पास की गतिविधियों की जानकारी ही नहीं, जब के सच तो ये हे की बिना पशु पक्छी, जंगल आदि के आदमी की जिंदगी भी तो अधूरी हे ,
गोरैया जैसे छोटे पक्षियों के लिए न ही रहने की जगह बची है और न ही उनके लिए भोजन की व्यवस्था बची है। खेत खलिहान नहीं हैं। संचार के साधनों का हो रहा बहुत ज्यादा उपयोग पक्षियों की जान ले रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो 15 साल में गोरैया सहित अन्य कई पक्षियों का नामोनिशान ही मिट चुका होगा। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र से विलुप्त हो चुके पक्षी। देशी गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, राज गिद्ध, काला गिद्ध व सफेद गिद्ध। कुछ साल पहले तक कई जगह काला गिद्ध देखा गया है, अब नहीं है। -प्रश्न ये हे की इसको कोन बचाये? ,
एक बात जरूर हे , अगर पशु पक्छी और जंगल नहीं बचे तो इंसानो को भी बचाना मुश्किल हो जायेगा .
प्रश्न १) अगर हर एक भारतीय कागज रहित काम करे तो क्या होगा ?
उत्तर :- प्रौद्योगिकी का विकास होगा ,
पेड़ नहीं काटेंगे तो सही समय से बरसात होगी , फसल बढ़ेगी , किसानों का फायदा होगा .
वातावरण सही रहेगा ,
आम नागरिक स्वस्थ रहेगा ,
देश का पैसा देश में रहेगा क्योंकि लोग स्वस्थ रहेंगे तो विदेशी दवा कोई नहीं खायेगा ,
भारत का पैसा भारत में ही रहेगा , विदेशी पैसे की जरूरत नहीं होगी ,
लगभग २ -३ लाख करोड़ रुपये का हर साल भारत देश बचत करेगा.
जिससे रोजगार पैदा होगा , लोग चिंता मुक्त होंगे , खुश रहेंगे .
प्रश्न २) अगर भारत का हर ब्यक्ति स्वच्छ भारत का सपना देखे तो क्या होगा?
उत्तर :- भारत दुनिया का सबसे स्वच्छ देश बन जायेगा . बीमारी देश को छोड़ देगी ,
कोई बीमार नहीं होगा . लोग स्वस्थ और खुश रहेंगे .
लेकिन स्वच्छता भारत जैसे देश में ये सरकार का काम है, अगर ये काम जनता का होजाए
तो भारत जल्दी स्वस्थ हो जायेगा , अगर अब भी जनता स्वच्छता के लिए सरकार को कोसती
है तो जल्दी ही चीन जैसी हालात हो जायेंगे , ऑक्सीजन भी पैसे से खरीदनी पड़ेगी.
प्रश्न ३) अगर भारत का हर परिवार दहेज़ को प्रतिबंदित करदे तो क्या होगा ?
उत्तर:- बैसे तो सरकार की तरफ से तो दहेज़ लेना देना भारत में बंद है, लेकिन अकल के अंधे और पैसे के
घमंडी लोग अब भी दहेज़ लेते देते है , अगर ये पूरी तरह बंद हो जाये तो भारत का करोड़ो रूपया
ख़राब होने से बच जायेगा वो इसलिए कि जिनके पास पैसा होता है वो लोग ही बेईमानी ज्यादा
करते है, और शादियों में फालतू के आडम्बर भी वो लोग ही समाज में पैदा करते है जिससे माध्यम
बर्गीय परिवार और गरीब परिबार में भी यही बीमारी पनपती है , देश में सिर्फ २-३ प्रतिशत लोग ही
आमिर है , बाकि गरीब लोग उनकी नक़ल करने के चक्कर में बर्बाद होते है , अगर ये बीमारी खत्म
हो जाये तो तलाक के मुकदमे भी नहीं होंगे और न्ययाय पालिका भी बदनाम होने से बचेगी और
अगर दहेज़ कोई लेता है तो कोई देता भी है ऐसे मुकदमे में दोनों पक्ष को दोषी होना चाहिए
मेरा भारत
में अक्सर उन दिनों के बारे में सोचता हु , जब जंगलों को छोड़ घर मे भी गोरैया की चहचहाट सुनाई देती थी , लेकिन आज जंगलो में भी ये सब सुनाई नहीं देता , इंसान कितना निर्दयी हो गया और होता जा रहा हे , हम अक्सर भागती दौड़ती जिंदगी के पीछे इतने भाग रहे हे जिसका कोई अंत नहीं , और उसको छोड़ते जा रहे हे जो हमारा भविस्य नहीं ,
सुबह सुबह बिना किसी अलार्म के या घंटी केगोरैया की चहचहाट के साथ उठजाना, कितना अच्छा दिन होता था , लगता हे उन दिनों में बापस लोट जाऊँ , पर हकीकत तो ये हे की सब कुछ पा भी लिया जाये तो भी वो सब नहीं मिल सकता ,
गोरैया के साथ साथ जाने कितने पशु -पक्छी गायब हो गए लेकिन सभी को अपने आगे आने की ही पड़ी , पैसे के लिए इंसान इतना अँधा हो गया हे की अपने आस पास की गतिविधियों की जानकारी ही नहीं, जब के सच तो ये हे की बिना पशु पक्छी, जंगल आदि के आदमी की जिंदगी भी तो अधूरी हे ,
गोरैया जैसे छोटे पक्षियों के लिए न ही रहने की जगह बची है और न ही उनके लिए भोजन की व्यवस्था बची है। खेत खलिहान नहीं हैं। संचार के साधनों का हो रहा बहुत ज्यादा उपयोग पक्षियों की जान ले रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो 15 साल में गोरैया सहित अन्य कई पक्षियों का नामोनिशान ही मिट चुका होगा। वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र से विलुप्त हो चुके पक्षी। देशी गिद्ध, लंबी चोंच वाला गिद्ध, राज गिद्ध, काला गिद्ध व सफेद गिद्ध। कुछ साल पहले तक कई जगह काला गिद्ध देखा गया है, अब नहीं है। -प्रश्न ये हे की इसको कोन बचाये? ,
एक बात जरूर हे , अगर पशु पक्छी और जंगल नहीं बचे तो इंसानो को भी बचाना मुश्किल हो जायेगा .
👉 धैर्य हो तो नैपोलियन जैसा
🔴 सन् १८०७ की बात है। नैपोलियन बोनापार्ट की सेनाएँ नदी के किनारे खडी़ थीं। दुश्मन ने उसे चारों
तरफ ऐसे घेर रखा था जैसे पिंजडे़ में शेर। दाहिनी तरफ आस्ट्रियन फौजें थीं, पीछे जर्मन। रूस की दिशाल
सेना आगे अडी़-खडी़ थी। नैपोलियन के लिये फ्रांस से संबध बनाए रखना भी कठिन हो गया।
तरफ ऐसे घेर रखा था जैसे पिंजडे़ में शेर। दाहिनी तरफ आस्ट्रियन फौजें थीं, पीछे जर्मन। रूस की दिशाल
सेना आगे अडी़-खडी़ थी। नैपोलियन के लिये फ्रांस से संबध बनाए रखना भी कठिन हो गया।
🔵 यह स्थिति ऐसी ही थी जैसे कोई व्यक्ति स्वयं तो बीमार हो पत्नी, बच्चे भी बीमार हो
जाए। मकान गिर जाए और नौकरी से भी एकाएक नोटिस मिल जाए। घात-प्रतिघात
चारों ओर से आते है। मुसीबत को अकेले आना कमी पसंद नहीं लालची मेहमान की तरह
बाल बच्चे लेकर आते हैं। संकटों की सेना देखते ही सामान्य लोग बुरी तरह घबडा़ उठते,
नियंत्रण खो बैठते और कुछ का कुछ कर डालते हैं। आपात काल में धीरज और धर्म को
परख कर चलने को चेतावनी इसलिए दी गई है कि मनुष्य इतना उस समय न धबडा जाए
कि आई मुसीबत प्राणघातक बन जाए।
जाए। मकान गिर जाए और नौकरी से भी एकाएक नोटिस मिल जाए। घात-प्रतिघात
चारों ओर से आते है। मुसीबत को अकेले आना कमी पसंद नहीं लालची मेहमान की तरह
बाल बच्चे लेकर आते हैं। संकटों की सेना देखते ही सामान्य लोग बुरी तरह घबडा़ उठते,
नियंत्रण खो बैठते और कुछ का कुछ कर डालते हैं। आपात काल में धीरज और धर्म को
परख कर चलने को चेतावनी इसलिए दी गई है कि मनुष्य इतना उस समय न धबडा जाए
कि आई मुसीबत प्राणघातक बन जाए।
🔵 नैपोलियन बोनापार्ट-धैर्य का पुतला, उसने इस सीख को सार्थक कर यह दिखा दिया कि
घोर आपत्ति में भी मनुष्य अपना मानसिक संतुलन बनाए रखे तो वह भीषण संकटों को भी
देखते-देखते पार कर सकता है।
घोर आपत्ति में भी मनुष्य अपना मानसिक संतुलन बनाए रखे तो वह भीषण संकटों को भी
देखते-देखते पार कर सकता है।
🔴 नैपोलियन ने घबडा़ती फौज को विश्राम की आज्ञा दे दी। उच्च सेनाधिकारी हैरान थे कहीं
नैपोलियन का मस्तिष्क तो खराब नही हो गया। उनका यह विश्वास बढ़ता ही गया, जब
नैपोलियन को आगे और भी विलक्षण कार्य करते देखा। जब उसकी सेनाएँ चारों ओर से घिरी
थीं उसने नहर खुदवानी प्रारंभ करा दी। पोलैंड और प्रसिया को जोड़ने वाली सडक का निर्माण
इसी समय हुआ। फ्रेंच कालेज की स्थापना और उसका प्रबंध नैपोलियन स्वयं करता था।
फ्रांस के सारे समाचार इन दिनो नैपोलियन के साहसप्रद लेखों से भरे होते थे। फ्रांस, इटली
और स्पेन तक से सैनिक इसी अवधि में भरे गये नैपोलियन ने इस अवधि में जितने गिरिजों
का निर्माण कराया उतना वह शांति काल में कभी नही करा सका, लोग कहते थे नैपोलियन के
साथ कुछ प्रेत रहते हैं, यही सब इतना कम करते हैं पर सही बात तो यह है कि नैपोलियन यह
सब काम खुद से करता था। उसका शरीर एक स्थान पर रहता था पर मन दुश्मन पर चौकसी
भी रखता था और पूर्ण निर्भीक भाव से इन प्रबंधो में भी जुटा रहता था।
नैपोलियन का मस्तिष्क तो खराब नही हो गया। उनका यह विश्वास बढ़ता ही गया, जब
नैपोलियन को आगे और भी विलक्षण कार्य करते देखा। जब उसकी सेनाएँ चारों ओर से घिरी
थीं उसने नहर खुदवानी प्रारंभ करा दी। पोलैंड और प्रसिया को जोड़ने वाली सडक का निर्माण
इसी समय हुआ। फ्रेंच कालेज की स्थापना और उसका प्रबंध नैपोलियन स्वयं करता था।
फ्रांस के सारे समाचार इन दिनो नैपोलियन के साहसप्रद लेखों से भरे होते थे। फ्रांस, इटली
और स्पेन तक से सैनिक इसी अवधि में भरे गये नैपोलियन ने इस अवधि में जितने गिरिजों
का निर्माण कराया उतना वह शांति काल में कभी नही करा सका, लोग कहते थे नैपोलियन के
साथ कुछ प्रेत रहते हैं, यही सब इतना कम करते हैं पर सही बात तो यह है कि नैपोलियन यह
सब काम खुद से करता था। उसका शरीर एक स्थान पर रहता था पर मन दुश्मन पर चौकसी
भी रखता था और पूर्ण निर्भीक भाव से इन प्रबंधो में भी जुटा रहता था।
🔵 नैपोलियन की इतनी क्रियाशीलता देखकर दुश्मन सेनाओं के सेनापतियों ने समझा कि
नैपोलियन की सेना अब आक्रमण करेगी, अब आक्रमण करेगा। वे बेचारे चैन से नही सोये, दिन
रात हरकत करते रहे, इधर से उधर मोर्चे जमाते रहे। डेढ-दो महीनों में सारी सेनाएं थककर चूर
हो गईं। नैपोलियन ने इस बीच सेना के लिए भरपूर रसद, वस्त्र, जूते और हथियार भर कर रख लिए।
नैपोलियन की सेना अब आक्रमण करेगी, अब आक्रमण करेगा। वे बेचारे चैन से नही सोये, दिन
रात हरकत करते रहे, इधर से उधर मोर्चे जमाते रहे। डेढ-दो महीनों में सारी सेनाएं थककर चूर
हो गईं। नैपोलियन ने इस बीच सेना के लिए भरपूर रसद, वस्त्र, जूते और हथियार भर कर रख लिए।
🔴 तब तक बरसात आ गई। दुश्मन सेनाएँ जो नैपोलियन की उस अपूर्व क्रियाशीलता से भयभीत
होकर अब तक थक चुकी थीं विश्राम करने लगी। उन्होंने कल्पना भी न की थी कि वर्षा ऋतु में भी
कोई आक्रमण कर सकता है।
होकर अब तक थक चुकी थीं विश्राम करने लगी। उन्होंने कल्पना भी न की थी कि वर्षा ऋतु में भी
कोई आक्रमण कर सकता है।
🔵 आपत्तिकाल में धैर्य इसलिये आवश्यक है कि उस घडी में सही बात सूझती है कोई न कोई प्रकाश
का ऐसा द्वार मिल जाता है, जो न केवल संकट से पार कर देता है वरन् कई सफलताओ के रहस्य भी
खोल जाता है।
का ऐसा द्वार मिल जाता है, जो न केवल संकट से पार कर देता है वरन् कई सफलताओ के रहस्य भी
खोल जाता है।
🔴 वर्षा के दिन जब सारी सेनाएँ विश्राम कर रही थी, नैपोलियन ने तीनों तरफ से आक्रमण कर दिया
और दुश्मन की फौजों को मार भगाया। बहुत-सा शस्त्र और साज-सामान उसके हाथ लगा जिससे उसकी
स्थिति और भी मजबूत हो गई।
और दुश्मन की फौजों को मार भगाया। बहुत-सा शस्त्र और साज-सामान उसके हाथ लगा जिससे उसकी
स्थिति और भी मजबूत हो गई।
🌹 ~पं श्रीराम शर्मा आचार्य
🌹 संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे पृष्ठ 99

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